Sam Manekshaw

भारत का शूरवीर

अमृतसर से आई.एम.ए

सैम का जन्म अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने पिता की डॉक्टर बनने की इच्छा को ठुकरा दिया और आईएमए में शामिल हो गए।

फ्रंटियर फोर्स से लेकर गोरखा रेजिमेंट के सैम बहादुर बनने तक का सफर

अपने साहस और नेत्रत्व से उन्होन गोरखा सैनिकों का दिल जीता जिसके बाद उन्हें सैम बहादुर का नाम दिया गया

"They're Welcome to Tea in Srinagar"

सैम मानेकशॉ का प्रसिद्ध कथन था, "They are welcome to come and have tea in Srinagar, but I shall have mine in Lahore!"

1971 के युद्ध के दौरान रणनीति बनाते सैम मानेकशॉ

सैम ने बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बाद में उन्हें भारतीय सेना के पहले और एकमात्र फील्ड मार्शल के रूप में सम्मानित किया गया।

कविता और सैनिकों के प्रति प्रेम वाला  नायक

सैम न केवल सैन्य रणनीतिक थे बल्कि उन्हें कविता और साहित्य भी बहुत पसंद था।

वह शूरवीर जिसने भारत की नियति को आकार दिया

सैम मानेकशॉ ने हमारी आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और भारत की नियति को आकार दिया। वह एक सच्चे नायक के रूप में हमारे दिल और दिमाग में हमेशा रहेंगे।